नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। लोग अक्सर विषाक्त पदार्थों (डिटॉक्स) और वजन घटाने को निकालने के लिए शरीर से भोजन छोड़ने का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुष मंत्रालय ने इस मिथक को तोड़कर आयुर्वेदिक उपायों पर जोर दिया है।
मंत्रालय के अनुसार, भोजन छोड़ना न केवल हानिकारक है, बल्कि यह शरीर की पाचन शक्ति को कमजोर करता है, जो विषाक्त पदार्थों (विषाक्त पदार्थों) को जमा कर सकता है। आयुर्वेद में नियमित और संतुलित भोजन को स्वस्थ जीवन की कुंजी माना जाता है।
भोजन छोड़ने के बजाय, नियमित और संतुलित आहार, योग और प्राकृतिक उपचार शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाते हैं। आयुष मंत्रालय के पद के अनुसार, धारणा पूरी तरह से गलत है जो भोजन या वजन घटाने को छोड़ देती है। आयुर्वेद के अनुसार, अनियमित खाने की आदतें पाचन आग (पाचन शक्ति) को कमजोर करती हैं, जो चयापचय को धीमा कर देती है। यह शरीर में विषाक्त पदार्थ बनाता है, जिसे आयुर्वेद में ‘कॉमन’ कहा जाता है।
मंत्रालय ने कुछ सरल आदतों को अपनाने की सलाह दी है, जो स्वाभाविक रूप से बॉडी डिटॉक्स की मदद करते हैं। इसके लिए, नियमित समय पर संतुलित भोजन करना आवश्यक है। फाइबर, प्रोटीन और पोषक तत्वों के लिए बाजरा, हरी सब्जियां और फल शामिल हैं। गर्म पानी पीने से पाचन में सुधार होता है और विषाक्त पदार्थों को हटा देता है। इसके अलावा, योग और प्राणायाम जैसे सांस लेने वाले व्यायाम तनाव को कम करते हैं और शरीर की शुद्धि में सहायक होते हैं। नाक में तिल का तेल लगाना और हर्बल काढ़े जैसे तुलसी-युग्मक चाय पीना भी डिटॉक्स में मदद करता है।
पर्याप्त नींद और मौसम के अनुसार जीवनशैली (मौसम) को अपनाना भी आवश्यक है। मंत्रालय ने कहा कि आयुर्वेदिक डिटॉक्स में पंचकर्मा जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं, जिसे विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाना चाहिए।
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